भूख-प्यास से तड़प रही गायें, चारे का पैसा डकार गए जिम्मेदार

संवाददाता – विश्व सेवा संघ, हिंदी दैनिक समाचार पत्र, सिद्धार्थनगर


विकास खंड बढ़नी क्षेत्र के ग्राम पंचायत जुगडिहवा में संचालित गौशाला की स्थिति इन दिनों बेहद दयनीय और बदहाल हो चुकी है।
सरकारी योजना के तहत लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई यह गौशाला अब कब्रगाह में तब्दील हो गई है।
यहां न तो भूसे का इंतजाम है, न हरे चारे का। भूख-प्यास से तड़पती बीमार गायें दम तोड़ रही हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी चैन की नींद सो रहे हैं।


🟤 सड़ांध और दुर्गंध से भर गया परिसर

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गौशाला में मरी हुई गायों को भीतर ही दफनाया जा रहा है, जिन्हें कुत्ते नोच-नोचकर खा रहे हैं।
पूरे परिसर में सड़ांध और दुर्गंध फैली हुई है, जिससे वहां कुछ देर रुकना भी मुश्किल हो गया है।


🟠 केयरटेकर महीनों से नदारद, भुगतान नियमित

आश्चर्य की बात यह है कि पूर्व केयरटेकर का भुगतान तो हर महीने किया जा रहा है, लेकिन केयरटेकर महीनों से दिखाई ही नहीं दे रहे।
गौशाला में गायों की जगह अब कुत्ते और कौवे घूम रहे हैं।


🔴 प्रधान–बीडीओ की मिलीभगत से बंदरबांट का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान और बीडीओ की मिलीभगत से गौशाला की देखरेख का पैसा और गायों के चारे का बजट कागजों में हजम कर लिया गया है।
जमीनी स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं है।
बीमार गायें इलाज के अभाव में तड़प-तड़प कर मर रही हैं, और अधिकारी मौके पर झांकने तक नहीं आते।


🔷 ग्रामीणों की मांगें

1️⃣ प्रधान और बीडीओ के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाए।
2️⃣ गौशाला में चारा, पानी और इलाज की व्यवस्था तत्काल बहाल हो।
3️⃣ नए केयरटेकर की नियुक्ति व निगरानी समिति गठित की जाए।


📍 यह पूरा मामला प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है,
जिसकी चर्चा अब पूरे क्षेत्र में जोर-शोर से हो रही है।

By Abhay Pandey

"चाटुकारिता नहीं पत्रकारिता ✍️✍️"

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