विश्व सेवा संघ, संवाददाता आदिल अली

निघासन। शारदा नदी के कटान से लगातार प्रभावित हो रहे ग्रंट नंबर-12 गांव के विस्थापित परिवारों ने अब अपनी लड़ाई को लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाने का फैसला किया है। वर्षों से पुनर्वास की मांग पूरी न होने से नाराज ग्रामीणों ने आगामी चुनाव में मतदान का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि जब तक सरकार उन्हें रहने के लिए सुरक्षित भूमि, आवास और स्थायी पुनर्वास उपलब्ध नहीं कराती, तब तक वे मतदान में हिस्सा नहीं लेंगे।

ग्रामीणों के अनुसार, शारदा नदी के कटान ने गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। बड़ी संख्या में परिवार अपना घर और खेती गंवा चुके हैं। वर्तमान में करीब 200 परिवार गांव से लगभग दो किलोमीटर दूर तटबंध पर अस्थायी झोपड़ियों और तिरपाल के सहारे जीवन बिता रहे हैं। रोजगार और खेती के साधन खत्म हो जाने से उनके सामने रोजी-रोटी का भी संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों में कई बार प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और सर्वे भी कराया, लेकिन स्थायी पुनर्वास की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी वजह से लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।

विस्थापित महिला रामबेटी ने कहा, “हर साल बरसात आते ही डर सताने लगता है कि कहीं फिर से सब कुछ न उजड़ जाए। वर्षों से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं।

“कटान का असर गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय तक भी पहुंच चुका है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने विद्यालय के बच्चों को पास के कतकहिया स्थित सरकारी विद्यालय में स्थानांतरित कर दिया है, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि ग्रंट नंबर-12 लंबे समय से डूब क्षेत्र घोषित है। इसके बावजूद यहां पंचायत चुनाव कराए गए, सरकारी योजनाएं लागू की गईं और विकास कार्य भी हुए, लेकिन लोगों के सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था आज तक नहीं हो सकी।

इस संबंध में एसडीएम निघासन राजीव निगम ने बताया कि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि कटान प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई गई है तथा लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है।

By District Reporter Lakhimpur Kheri

"चाटुकारिता नहीं पत्रकारिता ✍️✍️"

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