विश्व सेवा संघ, संवादसूत्र लखीमपुर खीरी –

अपना जिला महाभारतकालीन इतिहास से जुड़ा है। कई ऐतिहासिक स्थल महाभारत काल के समय के हैं। प्रशासनिक अनदेखी के चलते उनकी पहचान धुंधली होती जा रही है लेकिन अब ये स्थान लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे।

निघासन के ढखरेवा चौराहे के आगे अंतर्वेद नाम के प्राचीन स्थल व सिंगाही के खैरीगढ़ में स्थित बाबा रामदास मंदिर का सौंदर्यीकरण व पर्यटन विकास कराया जाना है। शासन ने प्रत्येक स्थल के लिए डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपये बजट की मंजूरी दी है। *शिवनगरा गांव का उचवा आश्रम* मोहम्मदी। शिवनगरा गांव के पास गोमती नदी किनारे बने उचवा आश्रम महाभारत काल से जुड़ा है।

*रमियाबेहड़ स्थित अंतर्वेद* रमियाबेहड़। अंतर्वेद की ऐसी मान्यता है कि द्वापर युग में अज्ञात वास के समय पांडवों ने यहां 13 माह का समय बिताया था। सुरक्षा के लिए महाबली भीम ने चारों तरफ झील बनाई। पूर्व दिशा में द्वार बनाया, जो कि आज भी गवाह है। यह पांडवों की तपोभूमि के नाम से विख्यात है। बताया जाता है कि तपोभूमि की महानता को देखते हुए पांच सौ वर्ष पूर्व झंडी स्टेट के राजा रघुवर सिंह ने कई हेक्टेयर भूमि दान में देते हुए बीच वन में श्रीराम जानकी मंदिर बनवाया लेकिन देखरेख के अभाव में यह धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।

अंतर्वेद आश्रम के महंत गोकुल दास उर्फ राजू महाराज ने बताया कि यह स्थान जंगल में होने से यहां न तो बिजली है और न ही यहां आने-जाने के लिए सड़क। हर साल यहां भंडारा कराते हैं। सड़क न होने से वाहन फंस जाते हैं। सबसे बड़ी समस्या विद्युत कनेक्शन न होना है। वे 50 साल से यहां सेवा करते आ रहे हैं। *खैरीगढ का सिद्ध पुरुष रामदास बाबा का पावन स्थल* सिंगाही।

*ग्राम पंचायत दरियाबाद स्थित चौसंधे बाबा स्थान* बिजुआ। ग्राम पंचायत दरियाबाद स्थित चौसंधे बाबा मंदिर का सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार होगा। विधायक अमन गिरि ने शुक्रवार को चौसंधे बाबा आश्रम के प्रमुख ब्रह्मचारी जी और क्षेत्र की जनता के बीच इस महत्वपूर्ण जानकारी की घोषणा की। उन्होंने बताया कि जल्द ही वैदिक मंत्रोच्चार के साथ चौसंधे बाबा मंदिर परिसर में भूमि पूजन किया जाएगा। बिजुआ भाजपा मंडल अध्यक्ष धीरेंद्र सिंह ने बताया कि स्वीकृत धनराशि से मंदिर परिसर में कई विकास कार्य कराए जाएंगे।

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