विश्व सेवा संघ, संवाददाता
आदिल अली
सिंगाही (खीरी) – गांव मांझा में जौरहा नाले पर आवंटित खनन पट्टे को निरस्त कराने की मांग को लेकर किसान और सिख संगठन के लोगों का धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी नाले के किनारे टेंट लगाकर बैठे रहे। धरने में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि दो दिनों के भीतर खनन पट्टा रद्द नहीं किया गया तो वे खनन ठेकेदार की ओर से नाले में बनाए गए अस्थायी पुल को हटाने के लिए मजबूर होंगे। जौरहा नदी, जिसे सरकारी अभिलेखों में नाला दर्ज किया गया है, उस पर खनन विभाग द्वारा कुछ माह पहले बालू खनन के लिए पट्टे जारी किए गए थे।बताया गया कि ठेकेदारों ने रेत ढुलाई में दूरी कम करने के लिए नाले के भीतर होम पाइप डालकर अस्थायी पुल बना लिया है।
इसका स्थानीय किसान और सिख संगठन विरोध कर रहे हैं। मांझा गांव के पूर्व प्रधान संतोष कुमार राज, किसान नेता परमजीत सिंह पम्मी और जसवीर सिंह बाजवा ने कहा कि क्षेत्र के किसान हर साल बेमौसम बारिश, बाढ़ और कटान से पहले ही परेशान रहते हैं।बालू खनन होने से नाले का प्राकृतिक स्वरूप बदल जाएगा। भविष्य में कटान की समस्या और विकराल हो सकती है।
किसान नेताओं ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर वे दो बार जिलाधिकारी से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक खनन पट्टा निरस्त नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
