विश्व सेवा संघ, संवाददाता आदिल अली
लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बार फिर ऐतिहासिक अध्याय लिख गया है। पार्क प्रशासन ने तीन गैंडों को पकड़ कर खुले में आजाद करने में कामयाबी पाई है। इससे पहले भी दो चरणों में चार गैंडो को छोड़ा जा चुका है। गौरतलब है कि 22 मार्च से शुरू होने वाले गैंडा पुनर्वास के तीसरे चरण के पहले दिन विशेषज्ञों की टीम को मायूसी हाथ लगी थी।
सुबह से गैंडों ने अपनी लोकेशन नहीं दी। पार्क प्रशासन ने योजना के तहत 22 से 28 मार्च 2026 तक कुल 6 गैंडों को प्राकृतिक आवास में छोड़ने का लक्ष्य रखा था। दुधवा की छंगा नाला स्थित दूसरी गैंडा परियोजना से रविवार को दो गैंडो को पकड़कर खुले जंगल में आजाद करना था। कुल पांच गैंडों वाली इस परियोजना में पद्मश्री डॉ. केके शर्मा के नेतृत्व में विशेषज्ञों का दल मोर्चे पर उतरा। विश्व प्रकृति निधि की तकनीकी टीम के साथ मिलकर ऑपरेशन को अंजाम दिया जाना था, लेकिन गैंडे नजर नहीं आए।
कहा जा रहा था कि अगर मौसम ठीक हुआ तो ही 22 मार्च को चरण शुरू हो पाएगा। मौसम तो ठीक रहा और टीम कार्य को अंजाम देने पहुंच भी गईं लेकिन गैंडो की लोकेशन नहीं मिली। जिससे टीम को घंटों इंतजार के बाद भी वापस लौटना पड़ा था। एक बार फिर 23 मार्च टीम गैंडों की तलाश में निकली और इसमें कामयाबी पहले ही हाफ में मिल गई। एक नर हर्ष और एक मादा गैंडो को हाथियों की मदद से घेराबंदी कर गुवाहाटी से आए पद्मश्री डॉ. केके शर्मा और स्थानीय पशु चिकित्सकों की टीम ने ट्रेंकुलाइज किया।
इसके बाद टीम दूसरे हाफ में सक्रिय हुई और फिर एक मादा गैंडे को रेस्क्यू कर लिया। विशेषज्ञों ने तीनों का गहनता से निरीक्षण किया और फिर उनको रेडियो कालर लगाकर दुधवा के एसडी सिंह मचान के पास खुले में आजाद कर दिया। पिछले दो दिनों से लगातार काम कर रहे राजकीय हाथियों की थकान को देखते हुए अधिकारियों ने आगे की कार्रवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी। इसके पहले भी दो चरणों में चार गैंडों को परियोजना से खुले जंगल में छोड़ा जा चुका है। रेडियो कालर से उनके ऊपर पार्क प्रशासन की नजर रहेगी।
