फर्जी एफडीआर, अवैध कब्जे और विकास कार्यों में शिथिलता का आरोप; उच्चस्तरीय जांच की मांग

विश्व सेवा संघ संवाद सूत्र

बढ़नी, सिद्धार्थनगर। नगर पंचायत बढ़नी बाजार में अधिशासी अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहरा गया है। बृहस्पतिवार को आयोजित प्रेसवार्ता में नगर पंचायत अध्यक्ष सुनील अग्रहरि ने वित्तीय अनियमितता, प्रशासनिक शिथिलता और विकास कार्यों में बाधा जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि ‘हरजी ट्रेडर्स’ फर्म द्वारा कन्हा गौशाला से संबंधित एक टेंडर में लगभग 11.92 लाख रुपये की कथित फर्जी एफडीआर प्रस्तुत की गई। उनका कहना है कि बैंक स्तर से जानकारी मिलने के बावजूद अब तक कठोर कार्रवाई नहीं की गई। यदि यह तथ्य सही है तो यह नगर पंचायत की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।उन्होंने सरकारी भूमि—पशुचर व अन्य श्रेणी की जमीन—पर अतिक्रमण की शिकायतों पर भी प्रभावी कार्रवाई न होने की बात कही। अध्यक्ष के अनुसार, कई बार अवगत कराने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिससे नगर की सार्वजनिक संपत्तियों पर कब्जे की स्थिति बनी हुई है।विकास कार्यों में देरी, ठेकेदारों की लापरवाही तथा निर्देशों के अनुपालन में कथित उदासीनता को लेकर भी अध्यक्ष ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई, जिससे विकास कार्य प्रभावित हुए हैं।प्रेसवार्ता में जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में देरी और सुविधा शुल्क की शिकायतों का भी जिक्र किया गया। अध्यक्ष ने कहा कि यदि आम नागरिकों को मूलभूत सेवाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है तो यह प्रशासनिक जवाबदेही का विषय है। आम जनता ने अपना मत देकर नगर पंचायत अध्यक्ष को चुना है तो कोई भी समस्या होने पर चेयरमैन से ही ज्यादातर सवाल जवाब करती है। और समय से जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र परिवार रजिस्टर नकल आदि अन्य विकास कार्य नहीं होने पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करती है। नगर पंचायत अध्यक्ष का साफ तौर पर कहना है कि चुनाव के समय जनता के बीच उन्हें जाना पड़ता है। अधिकारियों को नही। शायद इसलिए जिम्मेदार अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं। इस संबंध में अधिशासी अधिकारी अजय कुमार ने आरोपों को निराधार बताया और कहा कि नगर पंचायत के सभी कार्य नियमों के अनुरूप किए जा रहे हैं।अब आम जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उच्चाधिकारियों द्वारा इन आरोपों की जांच कब और किस स्तर पर की जाती है।यह देखने वाली बात है।

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