विश्व सेवा संघ संवाद सूत्र

बढ़नी – नगर पंचायत बढ़नी रेलवे स्टेशन के पश्चिम स्थित गेट संख्या 87 A रेलवे क्रॉसिंग आज कस्बे की सबसे बड़ी जनसमस्या बन चुकी है। दिनभर ट्रेनों के लगातार आवागमन के कारण यह क्रॉसिंग कभी आधे घन्टे तो कभी पूरे एक घन्टे तक बन्द रहती है। इसका सीधा असर आम जनता के दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। हालात इतने गम्भीर हो चुके हैं कि यदि किसी की अचानक तबीयत बिगड़ जायें, तो मरीज और उसके परिजनों के सामने ईश्वर के सिवा कोई सहारा नहीं रह जाता। यह क्रॉसिंग केवल एक रास्ता नहीं, बल्कि कस्बे की जीवनरेखा है। इसी रास्ते से लोग पीएचसी बढ़नी तक पहुंचते हैं। इसी मार्ग से स्कूली छात्र-छात्राएं रोज आना-जाना करते हैं और इसी से सैकड़ों परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतें जुड़ी हैं। लेकिन ट्रेन गुजरते ही वाहनों की लम्बी कतारें लग जाती हैं। पैदल राहगीरों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। समय पर स्कूल पहुंचना, अस्पताल तक समय से पहुंचना, सब कुछ जैसे किस्मत के भरोसे छोड़ दिया गया है। समस्या के समाधान के लिए रेलवे द्वारा फ्लाईओवर निर्माण का प्रस्ताव भी तैयार किया गया था। यदि यह फ्लाईओवर बन जाता, तो न केवल ट्रैफिक की समस्या से राहत मिलती, बल्कि आपातकालीन स्थितियों में लोगों की जान भी बचाई जा सकती थी। लेकिन दुर्भाग्यवश कस्बे के कुछ तथाकथित “सफेदपोश” नेताओं के विरोध के चलते यह प्रस्ताव रद्द कर दिया गया। अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह विरोध किसके हित में था – जनता के या व्यक्तिगत स्वार्थ के? वहीं यह तर्क दिया गया कि बाईपास बनने से केवल बाहरी वाहनों को नेपाल जाने में सुविधा होगी। लेकिन यह तर्क अधूरा और भ्रामक है। बाईपास से भले ही बाहरी यातायात को लाभ मिले, लेकिन कस्बे के भीतर रहने वाले लोगों की बुनियादी जरूरतें पीएचसी, स्कूल, बाजार सब इसी रेलवे क्रॉसिंग से जुड़ी हैं। बाईपास आम जनता की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान नहीं है। आज आवश्यकता इस बात की है कि राजनीतिक विरोध और स्वार्थ से ऊपर उठकर जनहित को प्राथमिकता दी जाये। वहीं बढ़नी की जनता कोई विशेष सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षित और सुगम आवागमन का अधिकार मांग रही है। रेलवे क्रॉसिंग पर फ्लाईओवर या अण्डरपास का निर्माण अब विलासिता नहीं, बल्कि जीवन रक्षक आवश्यकता बन चुका है। यदि समय रहते इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो यह संकट और गहराता जायेगा। समाज, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को मिलकर यह सोचना होगा कि विकास किसके लिए होता है, कुछ गिने-चुने लोगों के लिए या पूरे समाज के लिए। वहीं बढ़नी की जनता अब जवाब चाहती है और समाधान भी।

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