
विश्व सेवा संघ, हिंदी दैनिक समाचार पत्रजनपद – सिद्धार्थनगर | संवाददाता विशेष रिपोर्ट
सिद्धार्थनगर।
जनपद सिद्धार्थनगर के किसानों का हाल इन दिनों अत्यंत दयनीय है। कभी बारिश न होने से खेत सूखे रहे, तो अब अत्यधिक वर्षा ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है।
पहले किसानों ने सूखे की मार झेली, फिर यूरिया खाद की किल्लत से जूझना पड़ा। कई किसानों ने दिन-रात लंबी लाइनों में लगकर, पुलिस की लाठियाँ खाकर किसी तरह अपनी फसलों को संभालने का प्रयास किया।
परंतु अब जब खेतों में सुनहरी बालियाँ झूमने को थीं, तब इंद्रदेव की नाराज़गी ने सब कुछ डुबो दिया।
“जब पानी की दरकार थी, तब आसमान सूखा रहा,
अब जब जरूरत नहीं, तो बारिश बिन बुलाए मेहमान बन आई।”
धान के खेतों में पानी भर गया है, कई जगहों पर फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं। किसान निराश हैं, उनके चेहरों से उम्मीद का प्रकाश गायब हो चुका है।
🚜 किसानों की पुकार – “हमारा लोन माफ किया जाए”
किसानों का कहना है कि सरकार को उनकी इस स्थिति का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।
वे मांग कर रहे हैं कि सरकार कर्ज माफी और राहत पैकेज की घोषणा करे ताकि वे अपने परिवार और खेत दोनों को बचा सकें।
किसानों की यह पुकार अब एक राहत की नहीं, बल्कि जीविका की पुकार बन चुकी है।
🕊️ संपादकीय संवेदना
विश्व सेवा संघ परिवार प्रदेश व देश के सभी किसानों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है।
हमारे देश का अन्नदाता आज कुदरत और व्यवस्था दोनों की मार झेल रहा है।
सरकार से निवेदन है कि वह किसानों की समस्या पर त्वरित ध्यान दे और कर्ज माफी सहित व्यापक राहत योजना बनाकर किसानों की सहायता करे।
“आँखों में आँसू, खेत में पानी…
और मन में सवाल — आखिर कब तक झेलेगा किसान?”
जय जवान, जय किसान, जय हिंद, जय भारत 🇮🇳